संसदीय परंपरा की धज्जियां उड़ा रहा विपक्ष, गरजे विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह.. पूरे विपक्ष को किया…

 रायपुर . छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज 18 जुलाई को आखिरी सत्र है. मानसून सत्र के आखिरी दिन आज भी सदन की कार्रवाई हंगामेदार रहने की संभावना है. मानसून सत्र के दौरान विपक्ष में खाद किस समेत कई मुद्दों पर जमकर हंगामा किया. मानसून सत्र के चौथे दिन विपक्ष का हंगामा इस कदर रहा कि शांत और सरल रहने वाले विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह भी भड़क उठे और गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्ष 25 सालों की स्वर्णिम संसदीय परंपरा को धज्जियां उड़ा रहा है. विपक्ष के गैर जिम्मेदार रवैया के चलते उन्होंने पूरे दिन भर की कार्रवाई के लिए विपक्ष विधायकों को निलंबित कर दिया.

 दरअसल कांग्रेस के विधायक प्रश्न कल के दौरान डीएपी खाद के मुद्दे को लेकर सरकार को घर रहे थे. कांग्रेसी विधायक उमेश पटेल ने सरकार से सवाल किया था कि जून महीने के आखिर तक प्रदेश में डीएपी का कितना भंडारण हुआ और उनमें कितना हिस्सा सहकारी समिति को दिया गया और कितना निजी क्षेत्र को.कृषि मंत्री इसका सीधा-सीधा जवाब नहीं दे रहे थे. उन्होंने कहा कि अब तक करीब 174 लाख मैट्रिक टन डीएपी धन खाद का भंडारण हो चुका है इनमें से 64% खाद का आवंटन सहकारी समिति को किया गया है. सिर्फ 36% खाद का आवंटन निजी छात्रों को हुआ है. जबकि विगत वर्षों से यह नियम था कि 40% निजी क्षेत्र को और 60% सहकारी क्षेत्र को आवंटन किया जाता है.

 उन्होंने सदन को यह भी बताया कि अब यह फैसला लिया गया है कि आने वाली डीएपी की पूरी की पूरी खेत सहकारी समिति को दे दी जाएगी. भविष्य के लिए खाद्य आवंटन का रेशियो भी सरकार बदलने जा रही है .अभी 60 और 40 का जो अनुपात है उसे बदलकर 80 और 20% किया जाएगा. 80% सहकारी समिति को और 20% निजी क्षेत्र को दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई तक रासायनिक उर्वरक की एक बड़ी खेत प्रदेश तक पहुंच रही है इससे डीएपी खाद का जो संकट चल रहा है उसमें राहत मिलेगी.

 लेकिन विपक्ष इस बात का जवाब जानने के लिए आ रहा की 30 जून 2025 तक प्रदेश में डीएपी का जो भंडारण था उसमें कितना प्रतिशत निजी क्षेत्र को हुआ और कितना सहकारी समिति को. बार-बार पूछने के बावजूद कृषि मंत्री इसका जवाब नहीं दे रहे थे. इसी बात से विपक्षी विधायक और संतुष्ट हो गए और उन्होंने सदन में नारेबाजी शुरू करद दी. उन्होंने  सरकार को किसान विरोधी बताते हुए उन्होंने कालाबाजारी करने का आरोप लगाया.