नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2027 में प्रस्तावित जनगणना के दौरान नागरिकों की जाति दर्ज करने, उसके वर्गीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय से याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने को कहा है।
कोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि जाति से जुड़े आंकड़ों की पहचान के लिए कोई पूर्व-निर्धारित डेटा मौजूद नहीं है। अदालत ने कहा कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बने 1990 के नियमों के अनुसार संचालित होती है। इन नियमों के तहत यह तय करने का अधिकार संबंधित अधिकारियों को है कि जनगणना किस तरीके से और किन बिंदुओं पर की जाएगी।
अदालत ने जताया भरोसा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि संबंधित प्राधिकरण विषय विशेषज्ञों की सहायता से एक मजबूत और विश्वसनीय व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे किसी भी तरह की त्रुटि की संभावना न रहे। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दे प्रासंगिक हैं और इन्हें पहले ही रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रखा जा चुका है।
PIL का निपटारा, सुझावों पर विचार का निर्देश
इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया और केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिका और कानूनी नोटिस में दिए गए सुझावों पर उचित विचार कर सकती है।
2027 की जनगणना की खास बातें
वर्ष 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार होगी, जब व्यापक स्तर पर जाति आधारित गणना की जाएगी। इसके साथ ही यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी, जिससे आंकड़ों के संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
याचिका में क्या उठाए गए थे सवाल
यह याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल द्वारा दायर की गई थी, जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने पक्ष रखा। याचिका में मांग की गई थी कि जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज करने, उसे वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि जनगणना संचालन निदेशालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकों की जाति पहचान दर्ज करने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे, जबकि इस बार जाति गणना का दायरा अनुसूचित जाति और जनजाति से आगे बढ़ाया जा रहा है।